जय माता दी  (Jai MATA DI)

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

सिंहाचलम का श्री वराह लक्ष्मी नृसिंह स्वामी मंदिर

2019-11-14 17:47:27, comments: 0

सिंहाचलम का श्री वराह लक्ष्मी नृसिंह स्वामी मंदिर भगवान विष्णु के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है क्योंकि यह मंदिर विष्णु के नौवें अवतार, भगवान नृसिंह को समर्पित है। यह मंदिर पहाड़ी की चोटी पर बनाया गया है जिसे सिंहाचलम या शेर की पहाड़ी कहा जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर तिरुपति मंदिर के बाद भारत का दूसरा सबसे अमीर मंदिर है।

यह मंदिर उड़ीसा और द्रविड़ शैली की वास्तुकला के समामेलन को प्रदर्शित करता हैं। हिंदू पौराणिक कथा अनुसार, अपने भक्त प्रहलाद को उसके क्रूर पिता के होथों से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह का रूप धारण किया। प्रहलाद के पिता को एक वरदान दी गया था कि उसे ना कोई मानव या जानवर मार सकता है और उसकी मृत्यु ना तो पृथ्वी ना आकाश में होगी।

 

The Sri Varaha Lakshmi Narasimha Swamy Temple of Sinhachalam is very popular among the devotees of Lord Vishnu as the temple is dedicated to the ninth incarnation of Vishnu, Lord Narasimha. The temple is built on top of a hill called Sinhachalam or Lion's Hill. The temple is said to be the second richest temple in India after the Tirupati temple.

The temples display an amalgamation of Odisha and Dravidian style of architecture. According to Hindu mythology, Lord Vishnu took the form of Narsingh to save his devotee Prahlada from the lips of his cruel father. Prahlada's father was given a boon that no human or animal could kill him and he would neither die on earth nor in the sky.

 

 

भगवान विष्णु ने आधे मानव और आधे शेर का रूप धारण किया और प्रहलाद के पिता को अपनी गोद में बैठाकर उनके प्राण हर लिए। इस मंदिर को नृसिंह के अठारह क्षेत्रों में से एक के रुप में गिना जाता है या इसे भगवान नृसिंह का मंदिर भी माना जाता है।

 

Lord Vishnu took the form of a half-human and half-lion, and killed Prahlada's father by sitting on his lap. This temple is counted as one of the eighteen regions of Narsingh or is also considered to be the temple of Lord Narsingh.

 

 

यह धारणा है कि पहले जब कुछ मुस्लिम आक्रमणकारी इस मंदिर को नष्ट करना चाहते थे, तो कुमारनाथ नामक एक धार्मिक कवि ने भगवान नृसिंह से निवेदन किया, तब तांबे की कुछ मक्खियों के एक झुंड़ ने आक्रमणकारियों पर हमला किया और फिर वे सिंहाचलम की पहाड़ियों के पिछे कहीं गायब हो गईं।

 

It is believed that at first when some Muslim invaders wanted to destroy this temple, a religious poet named Kumarnath requested Lord Narasimha, then a bunch of copper flies attacked the invaders and then they went to the hills of Sinhachalam. The last disappeared somewhere.

सिंहाचलम के लोग मानते हैं कि भगवान नृसिंह की दया के कारण यह मंदिर लूटने से तथा नाश होने से बच गया। सिंहाचलम जाने वाली सड़क आसपास की हरियाली के साथ एक सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करती है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि यह मंदिर जहां खड़ा है वह स्थान कितना अद्भुत है।

 

People of Sinhachalam believe that due to the mercy of Lord Narsingh, this temple was saved from being looted and destroyed. The road leading to Sinhachalam presents a beautiful picture with the surrounding greenery. Needless to say how amazing the place where this temple stands.

 

 

 

 

 

 

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