जय माता दी  (Jai MATA DI)

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

सिंहाचलम मंदिर – यहाँ पर वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप विराजित है माँ लक्ष्मी के साथ

2019-03-01 14:53:53
आंध्रपदेश के विशाखापट्टनम से महज 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत पर स्थित है सिंहाचलम मंदिर। इस मंदिर भगवान नृसिंह का घर कहा जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है की यहाँ पर यहाँ पर भगवान् विष्णु के वराह और नृ...
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गड़ियाघाट माता मंदिर – माता के इस मंदिर में नदी के पानी से जलती है अखंड ज्योत

2019-03-01 14:50:14
मध्यप्रदेश के गड़ियाघाट माताजी के मंदिर को अनोखी घटना के लिए जाना जाता है। कालीसिंध नदी के किनारे बने इस मंदिर में दीपक जलाने के लिए घी या तेल की जरूरत नहीं होती बल्कि, वह पानी से जलता है। इसे देखने के...
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रावण और कुंभकरण ने लिए थे तीन जन्म,

2018-10-29 17:13:17
इस दुनिया में रावण या कुंभकरण नाम का कभी कोई दूसरा नहीं हुआ। राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण को 'दशानन' भी कहते हैं। कहा जाता है कि रावण लंका का तमिल राजा था। रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और ...
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माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां-वहां बने शक्तिपीठ

2018-10-10 14:36:53
कहानी है कि आदि शक्ति के एक रूप सती ने शिवजी से विवाह किया, लेकिन इस विवाह से सती के पिता दक्ष खुश नहीं थे। बाद में दक्ष ने एक यज्ञ किया तो उसमें सती को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया। सती बिना ब...
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बगलामुखी मंत्र और आरती, इनके प्रभाव से मिलती है दुश्मनों पर जीत और कोर्ट केस में सफलता

2018-10-10 14:34:58
बगलामुखी देवी ब्रहमांड की दस सर्वश्रेष्ठ शक्तियों में से एक है। ये दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। ये कलयुग की अधिष्ठात्री देवी हैं। कलयुग में इनकी&nbs...
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नवरात्र / माता के इन 21 स्वरूपों की करें आराधना, सभी कष्ठ हो सकते हैं दूर

2018-10-10 14:31:38
शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है, जो 18 अक्टूबर को समाप्त होंगी। इस दौरान देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। आज हम आपको माता के विशेष स्वरूप के बारे में बता रहे हैं, जिनकी आ...
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पवित्र कथा महाकालेश्वर की, जानिए कबसे भगवान महाकाल उज्जैन में विराजित हैं

2018-08-21 21:22:52
उज्जयिनी में राजा चंद्रसेन का राज था। वह भगवान शिव का परम भक्त था। शिवगणों में मुख्य मणिभद्र नामक गण उसका मित्र था। एक बार मणिभद्र ने राजा चंद्रसेन को एक अत्यंत तेजोमय 'चिंतामणि' प्रदान की। चंद्रस...
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