जय माता दी  (Jai MATA DI)

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

रक्षाबंधन क्यों मनाते है ( Story of Raksha Bandhan)

2015-10-01 07:35:40, comments: 0

ये कथा उस समय की है जब माता सती ने शिव को पाने के लिए दूसरा जन्म पार्वती के रूप में लिया!. माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए प्रेम और भक्ति का मार्ग़ अपनाया!
एक समय माता पार्वती को देव ऋषि नारद ने अपने हाथो से मिटटी का शिवलिंग बनाने के लिए कहा !
जब माता पार्वती ने मिटटी का शिवलिंग बनाया ! और महादेव ने उनकी परीक्षा लेने के लिए शिव ने उस शिवलिंग को तोड़ दिया , इस से वह बहुत दुखी हो गयी तभी वहा भगवान विष्णु जी उनकी रक्षा के लिए आये .
भगवान विष्णु ने हर जन्म में माता पार्वती की मदद की थी इस बार भी वह उनकी मदद के लिए आये थे. तभी माता पार्वती ने उनको सहायता के लिए मना कर दिया और बोला की ये मेरी परीक्षा है इस को मुझे ही पूरा करना है!
माता पार्वती ने भगवन विष्णु के हाथ की कलाई पर एक धागा बाँधा और बोला की आज से आप मेरे भाई हो, आप को मुझे बचन देना होगा की जब तक में महादेव को खुद नही पा लेती तब तक आप मेरी कोई सहायता नही करोगे. इस पर विष्णु भगवान ने उनको बचन दे दिया.
तभी से है हर बहन अपने भाई की कलाई पर धागा बाधाने लगी. इस लिए ये दिन रक्षा बंधन के नाम से जाना चाहता है

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