जय माता दी  (Jai MATA DI)

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

मनसा देवीजी की चालीसा

2018-03-04 11:46:39, comments: 0

मनसा देवीजी का मन्त्र ॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं एं मनसा दैव्ये स्वाहा॥ ॥ मनसा देवीजी की चालीसा-अमृतवाणी ॥ मनसा माँनागेश्वरी , कष्ट हरन सुखधाम। चिंताग्रस्त हर जीव के, सिद्ध करो सब काम॥ देवी घट-घट वासिनी, ह्रदय तेरा विशाल। निष्ठावान हर भक्त पर, रहियो सदा तैयार॥ पदमावती भयमोचिनी अम्बा, सुख संजीवनी माँजगदंबा। मनशा पूरक अमर अनंता , तुमको हर चिंतक की चिंता॥ कामधेनु सम कला तुम्हारी , तुम्ही हो शरणागत रखवाली। निज छाया में जिनको लेती , उनको रोगमुक्त कर देती॥ धनवैभव सुखशांति देना , व्यवसाय में उन्नति देना। तुम नागों की स्वामिनी माता, सारा जग तेरी महिमा गाता॥ महासिद्धा जगपाल भवानी, कष्ट निवारक माँकल्याणी। याचना यही सांझ सवेरे ,सवेरेसुख संपदा मोह ना फेरे॥ परमानंद वरदायनी मैया , सिद्धि ज्योत सुखदायिनी मैया। दिव्य अनंत रत्नों की मालिक, आवागमन की महासंचालक॥ भाग्य रवि कर उदय हमारा, आस्तिक माता अपरंपारा। विद्यमान हो कण कण भीतर, बस जा साधक के मन भीतर॥ पापभक्षिणी शक्तिशाला, हरियो दुख का तिमिर ये काला। पथ के सब अवरोध हटाना, कर्म के योगी हमें बनाना॥ आत्मिक शांति दीजो मैया , ग्रह का भय हर लीजो मैया। दिव्य ज्ञान से युक्त भवानी, करो संकट से मुक्त भवानी॥ विषहरी कन्या, कश्यप बाला, अर्चन चिंतन की दो माला। कृपा भगीरथ का जल दे दो, दुर्बल काया को बल दे दो॥ 

मनसा देवीजी का मन्त्र ॥
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं एं मनसा दैव्ये स्वाहा॥
॥ मनसा देवीजी की चालीसा-अमृतवाणी ॥
मनसा माँनागेश्वरी , कष्ट हरन सुखधाम।
चिंताग्रस्त हर जीव के, सिद्ध करो सब काम॥
देवी घट-घट वासिनी, ह्रदय तेरा विशाल।
निष्ठावान हर भक्त पर, रहियो सदा तैयार॥
पदमावती भयमोचिनी अम्बा, सुख संजीवनी माँजगदंबा।
मनशा पूरक अमर अनंता , तुमको हर चिंतक की चिंता॥
कामधेनु सम कला तुम्हारी , तुम्ही हो शरणागत रखवाली।
निज छाया में जिनको लेती , उनको रोगमुक्त कर देती॥
धनवैभव सुखशांति देना , व्यवसाय में उन्नति देना।
तुम नागों की स्वामिनी माता, सारा जग तेरी महिमा गाता॥
महासिद्धा जगपाल भवानी, कष्ट निवारक माँकल्याणी।
याचना यही सांझ सवेरे ,सवेरेसुख संपदा मोह ना फेरे॥
परमानंद वरदायनी मैया , सिद्धि ज्योत सुखदायिनी मैया।
दिव्य अनंत रत्नों की मालिक, आवागमन की महासंचालक॥
भाग्य रवि कर उदय हमारा, आस्तिक माता अपरंपारा।
विद्यमान हो कण कण भीतर, बस जा साधक के मन भीतर॥
पापभक्षिणी शक्तिशाला, हरियो दुख का तिमिर ये काला।
पथ के सब अवरोध हटाना, कर्म के योगी हमें बनाना॥
आत्मिक शांति दीजो मैया , ग्रह का भय हर लीजो मैया।
दिव्य ज्ञान से युक्त भवानी, करो संकट से मुक्त भवानी॥
विषहरी कन्या, कश्यप बाला, अर्चन चिंतन की दो माला।
कृपा भगीरथ का जल दे दो, दुर्बल काया को बल दे दो॥

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