जय माता दी  (Jai MATA DI)

“ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
 

जिस भूमि मेँ जैसे कर्म किए जाते हैँ ,वैसे ही संस्कार वह भूमि भी प्राप्त कर लेती है । इसलिए गृहस्थ को अपना घर सदैव पवित्र रखना चाहिए ।

2020-01-19 12:54:08, comments: 0

 

जिस भूमि मेँ जैसे कर्म किए जाते हैँ ,वैसे ही संस्कार वह भूमि भी प्राप्त कर लेती है । इसलिए गृहस्थ को अपना घर सदैव पवित्र रखना चाहिए ।
मार्कण्डेय पुराण मेँ एक कथा आती है >कि राम लक्ष्मण वन मेँ प्रवास कर रहे थे । मार्ग मेँ एक स्थान पर लक्ष्मण का मन कुभाव से भर गया , मति भ्रष्ट हो गयी । वे सोचने लगे - कैकेयी ने तो वनवास राम को दिया है मुझे नहीँ । मैँ राम की सेवा के लिए कष्ट क्योँ उठाऊँ?
राम ने लक्ष्मण से कहा - इस स्थल की मिटटी अच्छी दीखती है , थोड़ी बाँध लो । लक्ष्मण ने एक पोटली बना ली। मार्ग मेँ जब तक लक्ष्मण उस पोटली को लेकर चलते थे तब तक उनके मन मेँ कुभाव भी बना रहता था , किन्तु जैसे ही उस पोटली को नीचे रखते उनका मन राम सीता के लिए ममता और भक्ति से भर जाता था । लक्ष्मण ने इसका कारण रामजी से पूछा तो श्रीराम ने कारण बताते हुए कहा - भाई! तुम्हारे मन के इस परिवर्तन के लिए दोष तुम्हारा नहीँ बल्कि उस मिट्टी का प्रभाव है , जिस भूमि पर जैसे काम किए जाते हैँ उसके अच्छे बुरे परमाणु उस भूमिभाग मेँ और वातावरण मेँ भी छूट जाते है । जिस स्थान की मिटटी इस पोटली मेँ है, वहाँ पर सुंद और उपसुंद नामक दो राक्षसो का निवास था । उन्होँने कड़ी तपस्या के द्वारा ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके अमरता का वरदान माँगा । ब्रह्मा जी उनकी माँग तो पूरी करना चाहा किन्तु कुछ नियन्त्रण के साथ । उन दोँनो भाइयो मेँ बड़ा प्रेम था अतः उन्होँने कहा कि हमारी मृत्यु केवल आपसी विग्रह से ही हो सके । ब्रह्माजी ने वर दे दिया ।
वरदान पाकर दोनो ने सोचा कि हम कभी आपस मेँ झगड़ने वाले तो है नही अतः अमरता के अहंकार मेँ देवोँ को सताना शुरु कर दिया । जब देवो ब्रह्माजी का आश्रय लिया तो ब्रह्माजी ने तिलोत्तमा नाम की अप्सरा का सर्जन करके उन असुरो के पास भेजा । सुंद और उपसुंद ने इस सौन्दर्यवती अप्सरा को देखकर कामांध हो गये और अपनी अपनी कहने लगे तब तिलोत्तमा ने कहा कि मैँ तो विजेता के साथ विवाह करुँगी , तब दोनो भाईयो ने विजेता बनने के लिए ऐसा घोर युद्ध किया कि दोनो मर गये । वे दोँनो असुर जिस स्थान पर झगड़ते हुए मरे थे , उसी स्थान की यह मिटटी है । अतः इस मिटटी मेँ भी द्वेष , तिरस्कार , और वैर के सिँचन हो गया है ।

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